ले दे के अपने पास फ़क़त एक नज़र तो है

क्यूँ देखेँ ज़िन्दगी को किसी की नजर से हम _साहिर

जिंदगी की तमाम मुश्किलातों में अपने सपनों और अपने विश्वासों पर अड़े रहने का हौसला देती ये lines न जाने कितनों को हर रोज आगे बढ़ने की जद्दोज़हद के बीच पत्थर बन जाने से रोक लेती होंगी। और लोग कहते हैं समाज को साहित्य की क्या ज़रुरत ।हुँह😤

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s