बेजुबां शिकायतें

हवा चराग़ बुझाने लगी तो हमने भी

दिए की लौ की जगह तेरा इंतज़ार रखा ।- मोहसिन असरार

कितना मुश्किल होता है कुछ यादों को भूल पाना। खासकर जब आप सच में ही उन्हें भूल जाना चाहें और वो किसी साख की छाल की तरह चिपक पड़े ,और उनका टुकड़ा टुकड़ा आपको लहूलुहान कर जाए । कुछ चीजें शायद इंसान के अख्तियार से बाहर होती हैं और वो सरहदें नहीं जानती बेसाख्ता सबको लपेट लेती हैं विलियम गॉल्डिंग्स फरमाते हैं_

‘a person can do what he wills,but he can not will what he wills’

पर ऐसा करने की कोशिश करना और फिर न भूल पाना एक कैद में जीने की तरह होता है जहाँ कोई मसीहा नहीं पहुचता।उन्हें देखकर बस यही दुआ उठती है की उनके ग़मों को ग़लत करने के लिए ऊपर वाले को एक रास्ता तो देना ही चाहिए था।ऐसे चोट खाये दिल वैसे ही जीते हैं जैसे सूली पर ईसा मसीह। जमाने भर की चोट खाये लगुलुहान और असीम । मुहब्बत में मर जाना एक बार है और तिल तिल कर मारना दूसरी। खैर आज के लिए अलविदा।…

Advertisements

2 thoughts on “बेजुबां शिकायतें

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s