कलम के साथ ही हमने कूँची भी उठा ली थी तब पता नही था ये राह इतनी मुश्किल होगी।खैर कूँची तो वक़्त की धूल में गर्द खा गयी पर क़लम ने अब तक साथ नहीं छोड़ा ।फेसबुक पर डाले आठ साल हो गए बनाये हुए दस साल । कुछ चित्र आप सब के लिए भी।

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9 thoughts on “

  1. कलमकार के चित्र भी एक अलग ही छटा बिखेरते हैं। वैसे ही चित्रकार की कलम में भी एक अलग रंगत होती है। सौभाग्य से आपको दोनों ही कलाएं आती हैं। वक्त की धूल को साफ करके एक बार कूंची को ढूंढने का प्रयास कीजिए। यकीन मानिए, इस बार चित्र पहले से भी बेहतर सजेंगे।

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      1. आपका वास्तविक नाम तो नहीं पता फिर भी “जिंदगी से गुफ्तगू” के सौजन्य से अगला चित्र कब मिल रहा है हम सबको 😊

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  2. आपसे उस दिन कहना भूल गया मुझे चित्रकार से बहुत लगाव है जो अपने हाथ से जीवन का रंग भर देते है। वैसे किसी क्षेत्र को देखा जाय तो इनकी संख्या सबसे कम ही पाई जाती है। लेकिन होते ये अदभुत है।

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