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52 thoughts on “

    1. बेनाम लिखना फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन और जजमेंटल लोगों से बचने के लिए ज़रूरी था। बाक़ी हर जगह बेबाक़ी ही भाती है । बेशक़ खुद बनाया है , नैतिकता सिर्फ लिखावट में ही नही इंसान में खुद भी होनी चाहिए मेरा ऐसा मानना रहा है हमेशा से।

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      1. हाँ या न को सिलवटों तक नहीं खींचा जाता है सामान्य बुद्धि तो इसी में फस जाय

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      2. मनुष्य का ये हाल की लगता है मुँह को मशीन में डाल के चौड़ा कर दिया और शरीर को खींच कर चपटा कर दिया।क्या मानव जी उठेगा❓😥😥😥

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      1. तब तो ठीक है ये माना जाय बौद्धिक स्तर उच्च है सोच फड़फड़ाती नहीं बस उड़ जाती है कारण लोग सोच को पिजरे में बंद उड़ने का प्रयास करते है

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  1. गांधी की आत्मकथा,the city of joy, freedom of midnight,तस्लीमा नसरीन को मौका लगे तो जरूर पढिये

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  2. मैंने बहुत पहले पढ़ी थी अब वेद और उपनिषद पढ़ते है। एक समय प्रयाग की पब्लिक लाइब्रेरी की सारी हिंदी मीडियम बुक पढ़ डाले थे। अब तो खुद के विचार इतने हो गये है कैसे पढ़ा जाय

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      1. अरे वाह ! चलिए शुभकामनाएं आपको ! लिखिए कुछ गोर्की पर हमें भी समझने का मौका मिलेगा। प्रेमचंद तो बहुत प्रभावित थे उनसे इस बहाने समझ बढ़ेगी कुछ।

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      2. कॉम्युनिस्ट❓कहा जाता है 20तक पहुचते पहुचते आप कॉम्युनिस्ट नहीं बने तो जवानी बेकार है 30के बाद कॉम्युनिस्ट रह गये तो जीवन बेकार है❓

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      3. उग्रता और क्रांति को हम साम्यवाद की बापौती नहीं मानते अपने यहां नामवर जी ने भी अपना बुढ़ौती में अपना पाला बहुत हद तक बदल लिया रामविलास जी ने भी पर हमें याद रखना चाहिए एक विवेकानंद भी थे । बाकी सबकी अपनी प्रतिबद्धता है।

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      4. पढ़ने का शौक है तो बातों में मजा आता लेकिन यहाँ बाते ही नहीं होती

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  3. आजकल विमर्शों और राजनीति से अपच होगया है बहोत पढ़ चुके इसपर । अब केवल साहित्य पढ़ने का मन बना है और लिखने का।आलोचना भी किनारे रखी पड़ी है। देखते हैं…

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      1. शुक्रिया रिसर्च कर रही हूं हिंदी में। सिविल्स की कोचिंग भी ली साथ में।पर लगा कि बंधना मेरा इनर इंस्टिंक्ट नहीं है सो फिलहाल साहित्य समर में वापस!

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      2. कठोपनिषद तो ग्रेजुएशन में पढ़ा पर ओशो की उसकी व्याख्या दसवीं में ही पढ़ डाली थी।नचिकेता के प्रश्न प्रश्नाकुलता का चरम हैं।

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      3. अरे ओशो भटका देते है मैं उनकी संभोग से समाधि तक कि आलोचना अपने यूट्यूब चैनल में की है

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      4. ये फिराक वाली ये मत समझ फिराक तेरी फिराक है फिराक उसकी फिराक में है जो तेरी फिराक में है।क्या mtb है

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  4. यदि बुरा न लगे तो wtup num दे क्योंकि आपकीं पोस्ट पर बाते ठीक नहीं कोई पढ़ेगा तो अच्छा नही लगेगा

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    1. ब्लॉग लिखने और संवाद के लिए ही है। अकादमिक और बौद्धिक संवाद आपत्तिजनक नहीं हो सकते । बहरहाल लिखना ज्यादा बेहतर माध्यम है।व्हाट्सएप्प व्यक्तिगत संवाद के लिए बेहतर है।और वो मेरे करीबियों के लिए ही है।

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      1. हमारा जो दृष्टिकोण होता है वह हमें श्रेष्ठ कहता है समाज का जो चलन है वो सामने वालो को कुछ समझे लेकिन अच्छा नहीं समझ सकता है। विचार करियेगा परिवाद नहीं

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      2. सहजय मिला सो दूध सम मांगा मिला सो पानी कह कबीर रक्त सम जेमा आइचा तानी

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      3. आई मौज फकीर की दिया झोपड़ा फूक
        और कहता क्या है ?
        जो घर बारे आपने वो चले हमारे साथ।

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  5. नसरीन की एक लाइन मैं 5-10 में एक लड़का लाती मारती भर लात और कहती जा साला।आज भी चलती है

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